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केन्द्रीय मंत्री का विवादित बोल,बाढ़ को बताया दैवीय प्रकोप,बाढ़ पीड़ितों से नहीं मिलने की बताई बात

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बिहार—–

पटना: अत्यंत हैरान करनेवाली बात है कि एक केन्द्रीय मंत्री कैसे इस तरह का विवादित बयान दे सकता है जिसे सुनकर जनता हैरान रह जाये। भारतवर्ष में जब संविधान की रचना हो रही थी और सर्वसम्मति से भारतवर्ष को एक प्रजातांत्रिक देश घोषित किया गया था,तब संविधान के मूल में यह बताया गया कि प्रजातंत्र में जनता सर्वोपरि है। मंत्री या नेता जनसेवक होते हैं। जनता के लिए उन्हें काम करना होता है।


परन्तु लोक जनशक्ति पार्टी (पारस गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने बाढ़ को लेकर जो बयान दिया है उसकी आशा लोकतंत्र में कोई भी प्रबुद्ध व्यक्ति नहीं कर सकता। केन्द्रीय मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र हाजीपुर पहुंचने पर उन्होंने बाढ़ को लेकर जो बयान दिया है वह काफी हैरान करनेवाला बयान है। बाढ़ की विभीषिका को लेकर जब उनसे प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से ज़वाब दिया कि बाढ़ दैवीय प्रकोप है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं बाढ़ पीड़ितों से मिलने भी नहीं जाऊंगा। उन्होंने कहा कि उनकी अधिकारियों से बात हुई है और लोगों को मदद मिल रही है।
बताया जाता है कि हाजीपुर संसदीय क्षेत्र के कई इलाके बाढ़ में डूबे हुए हैं। अभी बिहार में कई केन्द्रीय मंत्री अपने इलाके में कैम्प कर बाढ़ पीड़ितों की हालात जानने और उन्हें आवश्यक सहायता पहुंचवाने के कार्य की स्वं देखभाल कर रहे हैं।बताते चलें कि केन्द्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस से पहलै केन्द्रीय मंत्री नित्यानंद राय,आरके सिंह, अश्विनी कुमार चौबे सहित अन्य बड़े चेहरों को अपने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए देखा जा सकता है। ऐसे में केन्द्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस का बयान कि बाढ़ एक दैवीय प्रकोप है और ऐसे में वे बाढ़ पीड़ितों से मिलने नहीं जायेंगे, काफी हैरान करनेवाली बात है।
दो दिन पहले पशुपति कुमार पारस केन्द्रीय मंत्री बनने के बाद बिहार पहुंचे जहां पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। पार्टी के सभी सांसद (चिराग पासवान को छोड़कर) उनके साथ मौजूद थे। वैसे उन्होंने कहा कि बाढ़ के समाधान के लिए नेपाल से केन्द्र सरकार की बातचीत चल रही है।इसमें समय लगेगा क्योंकि इसका एक प्रोसेस है।बाढ़ हर साल आती है और सरकार हर संभव मदद करती है।इस बार भी प्रशासन के तरफ से जो संभव होगा हमलोग मदद करेंगे।
प्रश्न यह उठता है कि राजकीय कोष पर जनता का अधिकार होता है और बिहार सरकार की बात करें तो बाढ़ पीड़ितों का पहला हक सरकारी खजाने पर है। ऐसे में उनकी मदद करना उनपर कोई एहसान करने जैसी बात नहीं है।
जे.पी.श्रीवास्तव,
ब्यूरो चीफ, बिहार।