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नेपाल सीमा से सटे जिलों में मदरसों की संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा, गोरखपुर में भी नियमों की अनदेखी

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प्रदेश सरकार ने मदरसों को आधुनिक बनाने के साथ उनकी संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पिछले साल सर्वे का काम करवाया था। इसमें कई चौकाने वाले खुलासे हुए थे। अभी कई जिलों से मदरसों द्वारा नियमों की अनदेखी और संदिग्ध गतिविधियों के संचालन की जानकारी सामने आ रही है। नेपाल सीमा से सटे महराजगंज व सिद्धार्थनगर जनपद में बिना मान्यता के 602 मदरसे चल रहे हैं। इनमें 15 की गतिविधियां संदिग्ध हैं। सिद्धार्थनगर जिले में सबसे अधिक मदरसे संचालित मिले हैं। इन मदरसों के आय के स्रोत खंगाले जा रहे हैं। इन मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या को तीन श्रेणियों बांटते हुए जानकारी जुटाई जा रही है। पहली श्रेणी में 100 से 200 छात्रों की संख्या वाले मदरसे, जबकि दूसरी श्रेणी में 200 से 500 से अधिक छात्रों के नामांकन वाले मदरसे और अंतिम श्रेणी में 500 से अधिक छात्रों वाले मदरसे शामिल हैं।सिद्धार्थनगर में सर्वाधिक 528 मदरसे बिना मान्यता के संचालित मिले हैं, जबकि महराजगंज में ऐसे मदरसों की संख्या 74 है। गोरखपुर में भी 179 मदरसे बिना मान्यता के संचालित मिले हैं। सिद्धार्थनगर की सदर तहसील में 175, बांसी में 136, डुमरियागंज में 108, इटवा में 76 और शोहरतगढ़ में 33 मदरसे बिना मान्यता के संचालित मिले हैं। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने भारत-नेपाल की सीमा से सटे सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर खीरी जिले के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को पत्र भेजकर मदरसों की आय के स्रोत के बारे में जानकारी देने को कहा था। उसमें यह जानकारी सामने आई है। पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में राज्य सरकार के मदरसा सर्वेक्षण के लिए 46 दिन का एक अभियान चलाया था। इस दौरान मदरों से इनकम, रजिस्ट्रेशन समेत 12 पहलुओं पर जानकारी मांगी गई थी। उस समय भी अधिकांश मदरसों ने दावा किया था कि उन्हें कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद जैसे शहरों से जकात मिली थी, लेकिन उन तक पहुंचने वाले पैसे का कोई रिकॉर्ड नहीं था।