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विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की बू, लोकार्पण के दिन ही हाइवे में 5 किमी तक गड्ढे

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बिहार———

पटना: बिहार में भ्रष्टाचार की पैठ इतनी गहरी हो चुकी है कि अब भगवान ही मालिक हैं। कोई भी विभाग हो वहां आप चले जायें किसी भी काम को लेकर,आप स्वयं समझ जाएंगे उस विभाग की असलियत। चाहे हम जितना ढिंढोरा पीट लें भ्रष्टाचार मिटाने का। चाहे जितने भी कानून भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए बना लिये जायें, परन्तु इसका कोई असर भ्रष्टाचारियों पर नहीं होनेवाला है।
खासतौर पर सड़क निर्माण हो,भवन निर्माण हो इसमें भी काफी शिकायतें मिलती रहती है। कभी नया बना पुल भर-भराकर गिर जाता है तो कभी हाइवे का हिस्सा अचानक धंस जाता है। सरकारी भवन का भी लगभग यही हाल है।
अभी जिसकी चर्चा यहां करने जा रहे हैं उसे जानकार काफी हैरानी होगी। बिहार विधानसभा की कमेटी ने हाइवे की जांच के क्रम में 220 करोड़ की लागत से बने राजमार्ग पर 5 किलोमीटर का हिस्सा टूटा-फूटा मिला है। इसमें गड्ढे भी थे जिसमें मछलियां भी तैर रही थी। यह महज रोड खराब होनेवाली बात नहीं थी, बल्कि राजमार्ग की ऐसी हालत उस दिन की है जिस दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका लोकार्पण किया।
बताते चलें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भागलपुर – अकबरनगर-अमरपुर दो लेन के राजमार्ग जिसकी लम्बाई 29.3 किलोमीटर है का लोकार्पण 25 अगस्त को विडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए किया था। राजकीय राजमार्ग 85 के नाम से दर्ज इस हाइवे का निर्माण राजबीर कंन्सट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने बिहार राज्य सड़क विकास निगम की निगरानी में किया था।
रोड खराब होने की शिकायत राजद विधायक और विधान सभा शून्य काल कमेटी के चेयरमैन चंद्रहास चौपाल को मिली। इसकी जांच उन्होंने खुद जाकर की और पाया कि पांच किलोमीटर तक फैली सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें आ गई है। चेयरमैन ने कहा कि यह बहुत शर्मनाक बात है कि लोकार्पण के दिन सड़क को खराब सामग्री से ढंक दिया गया था।
उन्होंने संबंधित कंन्सट्रक्शन कंपनी को काली सूची में डालने तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यहां करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है जिसकी जांच सीबीआई से कराई जाये। हद तो तब है जब खुद मुख्यमंत्री इस हाइवे का लोकार्पण करनेवाले थे,तब भी न तो कंन्सट्रक्शन कंपनी,न बिहार राज्य सड़क विकास निगम के अधिकारियों और न हाइवे ऑथोरिटी को इसकी परवाह थी। ऐसे में इस लापरवाही पर कार्रवाई की मांग करने और इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की बात बिल्कुल सही प्रतीत होता है।
दूसरी तरफ रोड खराब होने के जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि बारिश और बाढ़ के कारण कुछ जगहों पर दरारें आ गई। अधिकारी रोड निर्माण में ख़राब सामग्री के इस्तेमाल की बात से परहेज़ कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पिछले 12 दिनों से रोड के उपर से पानी बहता रहा है जिसकी वजह से रोड में दरारें आ गई और कुछ जगहों पर रोड खराब हो गया। अधिकारियों की मानें तो बाढ़ के चलते रोड के किनारे दोनों तरफ कंक्रीट की दिवार नहीं बन सकी जिसके कारण रोड पर पानी बहता रहा।
उधर चंद्रहास चौपाल ने कहा है कि विधायक इस मामले को शून्यकाल के दौरान उठायेंगे और शून्यकाल समिति द्वारा इस पर कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय नेताओं ने सड़क की गुणवत्ता को बेहद खराब बताते हुए भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
अब देखना यह है कि सचमुच इस मामले की जांच सरकार की ओर से कराई जाती है या कुछ दिनों बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
जे.पी.श्रीवास्तव,
ब्यूरो चीफ, बिहार।