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हरियाणा के गन्ने से घुलेगी तराई में मिठास।

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कोठीभार, भारत केसरी न्यूज़। पूर्वांचल में चीनी का कटोरा कहे जाने वाले महराजगंज जिले के गन्ना किसान इस बार नया प्रयोग कर रहे हैं। जिले के सिसवा क्षेत्र में हरियाणा, लखनऊ व शाहजहांपुर की गन्ना प्रजातियां इस बार मिठास घोलेंगी। लगातार रोगों का शिकार हो रही को. 0238 प्रजाति की जगह पर इस बार किसानों ने नई प्रजातियों को अपनाया है। चीनी मिलों, गन्ना उत्पादन समूहों की मदद से गन्ना किसानों को पौध मिली है।

पूरे गन्ना बेल्ट में करीब एक दशक से को. 0238 प्रजाति का बोलबाला था। चीनी रिकवरी और उत्पादन में इस प्रजाति का कोई जोड़ नहीं रहा। पर बीते दो वर्षों से यह किस्म रोगग्रस्त हो चुकी है। इस प्रजाति में रेड रॉट नामक रोग लग रहा है। गन्ना विभाग ने किसानों से यह प्रजाति न बोने की अपील की थी। मगर किसानों को विकल्प ही नहीं मिल पा रहा था। इस बार गन्ना विभाग, चीनी मिलों और समूहों के सहयोग से किसानों को तीन नई प्रजातियां भाईं हैं। इसके विकल्प के रूप में हरियाणा के करनाल की को. 0118, 15023, लखनऊ की को. लक. 14201 और शाहजहांपुर की को.स.13235 जैसे गन्ना की किस्में बोई गई हैं। मिल सिसवा के गन्ना प्रबंधक करमवीर सिंह कहते हैं कि को. 0118, को. 15023, को.लक.14201 व को.स.13235 रोग रहित हैं। वहीं जल जमाव वाले जगहों के लिए 98014 किस्म की प्रजाति किसानों के लिए फायदेमंद हैं, जिनकी बुआई वो कर सकते हैं। साथ ही इन प्रजातियों का चीनी रिकवरी और उत्पादन भी अच्छा है।