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Tokyo Paralympics में छाए नोएडा के डीएम सुहास एलवाई, पत्नी ने बताया उनकी सफलता का सीक्रेट

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Tokyo 2020 Paralympic Games : भारत के बैडमिंटन खिलाड़ी और नोएडा के डीएम सुहास यथिराज रविवार को टोक्यो पैरालंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर दुनियाभर में भारत का नाम रोशन कर दिया है। इन खेलों में भारत की पदक संख्या 19 पर पहुंच गई है। सुहास उत्तर प्रदेश कैडर के 2007 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी हैं।

38 वर्षीय सुहास रविवार को पुरुष एकल एसएल4 क्लास बैडमिंटन स्पर्धा के फाइनल में फ्रांस के लुकास माजूर से करीबी मुकाबले में हार गए जिससे उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। सुहास को दो बार के वर्ल्ड चैम्पियन माजूर से 62 मिनट तक चले फाइनल में 21-15 17-21 15-21 से पराजय का सामना करना पड़ा।एसएल4 क्लास में वो बैडमिंटन खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जिनके पैर में विकार हो और वे खड़े होकर खेलते हैं।

टोक्यो पैरालंपिक में सुहास एल.वाई. (Suhas LY) के प्रदर्शन पर उनके परिवार ने बहुत खुशी जताई है। पति की कामयाबी से खुश ऋतु सुहास ने कहा कि देश के लिए पैरालंपिक में खेलना सुहास का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी के कीमती 6 समर्पित कर दिए। जब वे पैरालंपिक में जा रहे थे तो मैंने उन्हें यही कहा था कि नतीजे की चिंता किए बिना वे बस अपना बेस्ट गेम खेलें और उन्होंने वही किया। यह मेडल सुहास की पिछले छह साल की मेहनत का फल है। हमारे लिए वो जीत चुके हैं, उन्होंने बहुत अच्छा खेला और देश का नाम रोशन किया है। हमें उन पर गर्व है। ये पूरे देशवासियों के लिए हर्ष का विषय है।

रितु ने कहा कि उनके सुहास अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करने पर यकीन रखते हैं। सरकारी सर्विस में होने के बावजूद वे गेम खेलने के लिए टाइम निकाल ही लेते हैं। उन्होंने खेलों को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा प्राथमिकता दी है। उसी की वजह से वे आज इस मुकाम पर हैं। रितु सुहास भी अपने पति की तरह एक प्रशासनिक अधिकारी हैं। इन दिनों वह गाजियाबाद में एडीएम एडमिनिस्ट्रेशन के पद पर तैनात हैं।

टोक्यो पैरालंपिक में सुहास के सिल्वर मेडल जीतने पर उनकी मां जयाश्री ने कहा कि मुझे अपने बेटे पर गर्व है, उन्होंने महान सफलता पाई है। मैंने उनके मैच का आनंद लिया। वह बचपन से खेल में सक्रिय थे और पढ़ाई में भी शानदार थे। भारत को उन पर गर्व है।

गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के जिलाधिकारी सुहास पैरालंपिक में पदक जीतने वाले पहले आईएएस अधिकारी भी बन गए हैं। सुहास ने बैडमिंटन में भारत के लिए तीसरा पदक जीतने के बाद कहा कि मैं अपने प्रदर्शन से बहुत खुश हूं, लेकिन मुझे यह यह मैच दूसरे गेम में ही खत्म कर देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इसलिए मैं थोड़ा सा निराश हूं कि मैं फाइनल नहीं जीत सका क्योंकि मैंने दूसरे गेम में अच्छी बढ़त बना ली थी, लेकिन लुकास को बधाई। जो भी बेहतर खेलता है, वो विजेता होता है। 

कर्नाटक के रहने वाले सुहास के टखनों में विकार है। कोर्ट के भीतर और बाहर कई उपलब्धियां हासिल कर चुके सुहास कम्प्यूटर इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी भी हैं। वह 2020 से नोएडा के जिलाधिकारी हैं और कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में मोर्चे से अगुवाई कर चुके हैं। उन्होंने 2017 में बीडब्ल्यूएफ तुर्की पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में पुरुष एकल और युगल स्वर्ण जीता। इसके अलावा 2016 एशिया चैम्पियनशिप में स्वर्ण और 2018 पैरा एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया। 

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी ने दी सुहास को बधाई   

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईएएस अधिकारी सुहास यथिराज को पैरालंपिक खेलों में सिल्वर मेडल जीतने पर बधाई दी। राष्ट्रपति ने कहा कि एक सिविल सेवक के तौर पर कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए खेलों के प्रति उनका समर्पण असाधारण है। वहीं, प्रधानमंत्री ने सुहास से फोन पर बात की और उन्हें खेल और सेवा का अद्भुत संगम बताया जिन्होंने पूरे देश को अपने खेल से प्रभावित किया।

कोविंद ने ट्वीट किया, ”सुहास यथिराज को बधाई जिन्होंने पैरालंपिक की बैडमिंटन स्पर्धा में विश्व के पहले नंबर के खिलाड़ी को कड़ी टक्कर दी और रजत पदक जीता। एक सिविल सेवक के तौर पर कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए खेलों के प्रति आपका समर्पण असाधारण है। उपलब्धियों से भरे भविष्य के लिए आपको शुभकामनाएं।”

प्रधानमंत्री ने ट्वीट में लिखा, “सेवा और खेल का अद्भुत संगम। सुहास यथिराज ने अपने असाधारण खेल की बदौलत पूरे देश को खुश कर दिया। बैडमिंटन में रजत पदक जीतने पर उन्हें बधाई। भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिये उन्हें शुभकामनाएं।” 

सीएम योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के डीएम सुहास यतिराज की कामयाबी पर खुशी जताते हुए कहा कि मैं उन्हें तहे दिल से बधाई देता हूं। इससे पहले भी कई मौकों पर उन्होंने कई मेडल जीते हैं। अपने प्रशासनिक कर्तव्यों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने के साथ-साथ, वह टोक्यो पैरालंपिक में भी सिल्वर मेडल जीतने में सफल रहे हैं। 

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