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गेहूं सरसों की फसलों को माहू रोग का खतरा, किसान खेतों में कर रहे हैं दवा का छिड़काव

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बरगदवां। महराजगंज (दिनेश गिरि)

क्षेत्र में गेहूं व सरसों की फसलों में माहू कीट का प्रकोप बढ़ गया है।जिससे फसलों के कम पैदावार होने की आंशका से किसानों में बेचैनी बढ़ गई है। किसानों को फरवरी माह में माहू कीट का प्रकोप ज्यादा बढ़ जानें से हो रहे नुकसान को देखते हुए कृषि जानकारों से किसानों ने उपाय की जानकारी लेकर फसलों में दवा का छिड़काव करा रहे हैं। क्षेत्र के बरगदवां, पिपरा,मंगलापुर, बेलहिया,कोहरगड्डी,दोगहरा, मनिकापुर,डगरूपुर, राजाबारी, आदि क्षेत्रों में रबी फसल में गेहूं तिलहर मूली,सलजम,आलू की फसलों में क‌ई प्रकार के किट व रोग फसल के विभिन्न अवस्थाओं में पौधों की वृद्धि फूल या फल बनाने की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फसलों की बढ़ोत्तरी की अवस्था में पौधों की पत्तियों में बहुत अधिक मात्रा में रस भरा होता है इससे आकर्षित होकर क‌ई प्रकार के किट रस चूसने वाली फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इसमें माहू रोग का प्रकोप ज्यादा है।जो गेहूं सरसों के साथ ही अन्य फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंच रहा है। कृषि जानकार किसानों का कहना है कि गेहूं सरसों की फसलों में माहू रोग फसल की बढ़ोत्तरी से लेकर फल व पत्तियां बनने तक पौधों को प्रभावित करती है। इसके लक्षण सरसों व तोरिया फसल में साफ दिखाई देता है यह फूलों के गुच्छे के पास बहुत अधिक मात्रा में छोटे छोटे हरे व काले रंग में किड़े पुष्प के निचले हिस्से में टहनी से रस चूसना शुरू करते हैं। अधिक प्रकोप होने पर फूल नष्ट हो जाता है जिससे फसलों की उपज में भारी मात्रा में कमी हो जाती है।माहू रोग के प्रकोप से गोभी, मूली की होने वाली पत्तियों का रंग हल्का पीला हो जाता है। कीड़े के अपशिष्ट पदार्थ के स्त्राव होने से काले रंग की फफूंदी जमने लगती है जिससे सभी पौधों की गुणवत्ता में कमी हो जाती है। फरवरी में माहू रोग का प्रकोप बढ़ गया है यह किट हल्के काले व हरे रंग का होता है शाम के समय हल्का अंधेरा होने पर काफी तेजी से उड़ता है खेतों के आस-पास घूमने पर आंखों में भी पहुंच कर काफी तेज जलन करते हैं। फसलों को नुकसान होता देख किसान ऋषिकेश यादव, मनोज, पवन कुमार दुबे,राधे वर्मा,राजन, सुदामा सहानी, आदि किसानों ने गेहूं व सरसों की फसलों में तेजी से दवा का छिड़काव करा रहे हैं।